शक्ति स्वरूपा योजना

सामाजिक स्थिति का आंकलन करें तो पाते हैं कि पति की मृत्यु उपरांत अथवा पति द्वारा तलाक दे देने (तलाकशुदा से आशय कानूनी रूप से न्यायालय द्वारा निर्णय पारित होने पर मान्य) महिला के पास कोई आर्थिक आधार नहीं रहता है जिससे वह अपना जीविकोपार्जन कर सके। अनेक बार परिस्थितियां सामने आती हैं कि कम उम्र की विधवा अथवा तलाकशुदा महिला अधिक पढ़ी लिखी नहीं होती है न ही व्यवसायिक रूप से दक्ष होती है ।

विधवा/तलाकशुदा महिलायें हैं जिन्हें शिक्षण-प्रशिक्षण में सहयोग, व्यवसायिक दक्षता के लिए मार्गदर्शन/आर्थिक आधार मजबूत करने के लिए स्वयं के व्यवसाय हेतु ऋण/अनुदान की अवश्यकता है के लिए शक्ति-स्वरूपा योजना राज्य के चयनित चार जिले यथा बस्तर, नारायणपुर,बीजापुर तथा दंतेवाड़ा में प्रारंभ की गयी है ।

योजना का उददेश्य:- गरीब परिवार की महिलाओं के पति की मृत्यु उपरांत/ तलाकशुदा महिला के जीवन यापन हेतु सहायता प्रदान करते हुए स्वावलंबी बनाना, जिससे वे स्वाभिमान तथा आत्मविश्वास के साथ अपने बच्चों तथा परिवार का पालन पोषण कर सके ।

योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही:-

  • प्रचलित गरीबी रेखा सर्वे सूची में स्वयं-हितग्राही अथवा उसके माता/पिता/पति (विधवा होने की दशा में पति का नाम भी हो सकता है) योजना हेतु पात्र होंगी ।
  • यदि हितग्राही का नाम गरीबी रेखा की सर्वे सूची में नहीं है तो उनके परिवार की वार्षिक आय 60000/-रूपये से कम हों योजना हेतु पात्र माने जायेंगे।(आय के संबंध में सक्षम अधिकारी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा)
  • हितग्राही महिला की आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य होनी चाहिये ।
  • हितग्राही महिला को छत्तीसगढ़ राज्य की मूल निवासी होनी चाहिये।

योजनान्तर्गत सहायता का स्वरूपः-
स्वयं का व्यवसाय आरंभ करने हेतु ऋण में सब्सिडीः-

बैंक द्वारा परियोजना प्रस्ताव पर सहमति मिलने उपरांत परियोजना प्रस्ताव की कुल लागत का 15 प्रतिशत अथवा अधिकतम 30 हजार रूपये की राशि विभाग द्वारा अनुदान के रूप में बैंक को अदा की जावेगी।
शिक्षा/उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता- योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही यदि बारहवीं से ऊपर शिक्षा प्राप्त करना चाहती है या महाविद्यालयों में संचालित व्यवसायिक प्रशिक्षण लेना चाहती है अथवा उच्च व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में संबंधित का चयन हो गया है किन्तु अर्थाभाव के कारण प्रवेश लेने में असमर्थ है तो उक्त शिक्षण/प्रशिक्षण पर होने वाला वास्तविक व्यय संस्था को सीधे ही प्रतिपूर्ति के रूप में उपलब्ध करा दिया जायेगा ।

  • यदि हितग्राही महिला व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहती हो तो उक्त प्रशिक्षण पर आने वाला व्यय योजनान्तर्गत वहन किया जावेगा जिसकी अधिकतम सीमा 25000/- होगी। हितग्राही को यथासंभव शासकीय अथवा शासन से संबद्ध प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।
  • पात्र हितग्राही को यदि

शक्ति स्वरूपा योजना

सामाजिक स्थिति का आंकलन करें तो पाते हैं कि पति की मृत्यु उपरांत अथवा पति द्वारा तलाक दे देने (तलाकशुदा से आशय कानूनी रूप से न्यायालय द्वारा निर्णय पारित होने पर मान्य) महिला के पास कोई आर्थिक आधार नहीं रहता है जिससे वह अपना जीविकोपार्जन कर सके। अनेक बार परिस्थितियां सामने आती हैं कि कम उम्र की विधवा अथवा तलाकशुदा महिला अधिक पढ़ी लिखी नहीं होती है न ही व्यवसायिक रूप से दक्ष होती है ।

विधवा/तलाकशुदा महिलायें हैं जिन्हें शिक्षण-प्रशिक्षण में सहयोग, व्यवसायिक दक्षता के लिए मार्गदर्शन/आर्थिक आधार मजबूत करने के लिए स्वयं के व्यवसाय हेतु ऋण/अनुदान की अवश्यकता है के लिए शक्ति-स्वरूपा योजना राज्य के चयनित चार जिले यथा बस्तर, नारायणपुर,बीजापुर तथा दंतेवाड़ा में प्रारंभ की गयी है ।

योजना का उददेश्य:-

गरीब परिवार की महिलाओं के पति की मृत्यु उपरांत/ तलाकशुदा महिला के जीवन यापन हेतु सहायता प्रदान करते हुए स्वावलंबी बनाना, जिससे वे स्वाभिमान तथा आत्मविश्वास के साथ अपने बच्चों तथा परिवार का पालन पोषण कर सके ।
योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही:-

  • प्रचलित गरीबी रेखा सर्वे सूची में स्वयं-हितग्राही अथवा उसके माता/पिता/पति (विधवा होने की दशा में पति का नाम भी हो सकता है) योजना हेतु पात्र होंगी ।
  • यदि हितग्राही का नाम गरीबी रेखा की सर्वे सूची में नहीं है तो उनके परिवार की वार्षिक आय 60000/-रूपये से कम हों योजना हेतु पात्र माने जायेंगे।(आय के संबंध में सक्षम अधिकारी का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करना होगा)
  • हितग्राही महिला की आयु 18 वर्ष से 50 वर्ष के मध्य होनी चाहिये ।
  • हितग्राही महिला को छत्तीसगढ़ राज्य की मूल निवासी होनी चाहिये।

योजनान्तर्गत सहायता का स्वरूपः-

स्वयं का व्यवसाय आरंभ करने हेतु ऋण में सब्सिडीः-

बैंक द्वारा परियोजना प्रस्ताव पर सहमति मिलने उपरांत परियोजना प्रस्ताव की कुल लागत का 15 प्रतिशत अथवा अधिकतम 30 हजार रूपये की राशि विभाग द्वारा अनुदान के रूप में बैंक को अदा की जावेगी।

शिक्षा/उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता- योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही यदि बारहवीं से ऊपर शिक्षा प्राप्त करना चाहती है या महाविद्यालयों में संचालित व्यवसायिक प्रशिक्षण लेना चाहती है अथवा उच्च व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में संबंधित का चयन हो गया है किन्तु अर्थाभाव के कारण प्रवेश लेने में असमर्थ है तो उक्त शिक्षण/प्रशिक्षण पर होने वाला वास्तविक व्यय संस्था को सीधे ही प्रतिपूर्ति के रूप में उपलब्ध करा दिया जायेगा ।

  • यदि हितग्राही महिला व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहती हो तो उक्त प्रशिक्षण पर आने वाला व्यय योजनान्तर्गत वहन किया जावेगा जिसकी अधिकतम सीमा 25000/- होगी। हितग्राही को यथासंभव शासकीय अथवा शासन से संबद्ध प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।
  • पात्र हितग्राही को यदि हास्टल या अन्य स्थान पर किराये से रहने की स्थिति बनती है तो जिला अधिकारी स्वयं-सत्यापन कर 1 हजार रूपये प्रति माह के मान से संबंधित हितग्राही को उपरोक्त के अतिरिक्त प्रदान की जायेगी। राशि नगद रूप में न देकर बैंक खाते के माध्यम से दी जावेगी।

व्यवसायिक उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता -

  • योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही महिला यदि व्यवसायिक उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती हों तो हितग्राही महिला को उच्च शिक्षा हेतु योजनान्तर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जावेगी किन्तु व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु समस्त अर्हताएं हितग्राही पूर्ण करती हों तथा संबंधित व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश की सहमति प्राप्त होने उपरांत राशि संस्थाओं को उपलब्ध कराई जायेगी।
  • योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिये आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा 1 लाख रूपये प्रतिहितग्राही प्रतिवर्ष होगी।
  • पात्र हितग्राही को यदि हास्टल या अन्य स्थान पर किराये से रहने की स्थिति बनती है तो जिला अधिकारी स्वयं-सत्यापन कर 1 हजार रूपये प्रति माह के मान से संबंधित हितग्राही को उपरोक्त के अतिरिक्त प्रदान की जायेगी।राशि नगद रूप में न देकर बैंक खाते के माध्यम से दी जावेगी।

या अन्य स्थान पर किराये से रहने की स्थिति बनती है तो जिला अधिकारी स्वयं-सत्यापन कर 1 हजार रूपये प्रति माह के मान से संबंधित हितग्राही को उपरोक्त के अतिरिक्त प्रदान की जायेगी। राशि नगद रूप में न देकर बैंक खाते के माध्यम से दी जावेगी।
व्यवसायिक उच्च शिक्षा हेतु आर्थिक सहायता -

  • योजनान्तर्गत पात्र हितग्राही महिला यदि व्यवसायिक उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती हों तो हितग्राही महिला को उच्च शिक्षा हेतु योजनान्तर्गत आर्थिक सहायता प्रदान की जावेगी किन्तु व्यवसायिक प्रशिक्षण प्राप्त करने हेतु समस्त अर्हताएं हितग्राही पूर्ण करती हों तथा संबंधित व्यवसायिक प्रशिक्षण संस्थान में प्रवेश की सहमति प्राप्त होने उपरांत राशि संस्थाओं को उपलब्ध कराई जायेगी।
  • योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिये आर्थिक सहायता की अधिकतम सीमा 1 लाख रूपये प्रतिहितग्राही प्रतिवर्ष होगी।
  • पात्र हितग्राही को यदि हास्टल या अन्य स्थान पर किराये से रहने की स्थिति बनती है तो जिला अधिकारी स्वयं-सत्यापन कर 1 हजार रूपये प्रति माह के मान से संबंधित हितग्राही को उपरोक्त के अतिरिक्त प्रदान की जायेगी।राशि नगद रूप में न देकर बैंक खाते के माध्यम से दी जावेगी।

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